Monday, 6 February 2017

सत्य रक्षक

             

                तुम हो, या कि हो आलोक,
                बढ़ते रहना है तुम्हे सत्य पथ की ऒर,
                थकना नहीं, बढ़ना ही मात्र लक्षय होगा,
                कंटीला रास्ता ही, केवल उपलब्ध होगा|

                रुकना नहीं, थमना नहीं, बढ़ते रहना है तुम्हे,
                जगाना है उन पंगुयूं को, खो चुके जो सत्य हैं,
                सत्य रक्षक, तिमिर भक्षक हो तुम्हीं,
                बंधनो का, नाश करते हो तुम्हीं|

                आभा तभी होगी, निशा होगी चारों ऒर,
                ले जाओगे असत्य को जब, सत्य पथ की ऒर,
                ढूंढता मंजिल हैं साधक, लक्ष्य को रखकर ह्रदय में,
                रश्मि पाता हैं उपासक, साधना की पूर्णता में
               
               
                तुम हो, या कि हो आलोक,
                बढ़ते रहना है तुम्हे सत्य पथ की ऒर,
                थकना नहीं, बढ़ना ही मात्र लक्षय होगा,
                कंटीला रास्ता ही, केवल उपलब्ध होगा|

                रुकना नहीं, थमना नहीं, बढ़ते रहना है तुम्हे,
                जगाना है उन पंगुयूं को, खो चुके जो सत्य हैं,
                सत्य रक्षक, तिमिर भक्षक हो तुम्हीं,
                बंधनो का, नाश करते हो तुम्हीं|

                आभा तभी होगी, निशा होगी चारों ऒर,
                ले जाओगे असत्य को जब, सत्य पथ की ऒर,
                ढूंढता मंजिल हैं साधक, लक्ष्य को रखकर ह्रदय में,
                रश्मि पाता हैं उपासक, साधना की पूर्णता में||

                                                                -  डॉ. मीनाक्षी सिंह 

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