व्यक्ति क्या है ? समाज की उपज है |
बिना व्यक्ति के, समाज नहीं संभव है |
व्यक्ति है क्या ? एक आईना है |
गुर्णों को समझने का, एक आईना है ||
जैसे आईने मैं तस्वीर दिखाए देती है |
उसी तरह व्यक्ति मैं एक छाप समायी रहती है|
व्यक्ति का उजागर उसके गुर्णों से होता है |
अच्छा बुरा और महान उसे व्यक्ति ही बनाता है||
जैसा हमारा तन, मन, बल और मनोबल |
अध्यात्म से ही मिलता, व्यक्ति को ये संबल|
समझो मेरे भाई, व्यक्ति ही है कुंजी |
मानवता के विकास की, सबसे बड़े है पूंजी ||
- डॉ. मीनाक्षी सिंह
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